राहुल गाँधी ने गुलाम नबी आज़ाद पर लगाया भाजपा से सांठगांठ का आरोप- जानिए

नई दिल्ली: अखिल भारतीय काँग्रेस पार्टी में नेतृत्व परिवर्तन और संगठन चुनाव की मांग को लेकर अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी को लेटर लिखने वाले नेताओं में शामिल गुलाम नबी आजाद ने सीडब्ल्यूसी बैठक में अपनी सफाई रखी है।

इसके साथ ही उन्होंने इस्तीफा देने की भी पेशकश की। राहुल गांधी की ओर से कथित तौर पर बीजेपी की मदद करने का आरोप लगाए जाने से आहत आजाद ने कहा कि यदि वह किसी भी रूप में बीजेपी की मदद कर रहे थे तो इस्तीफा दे देंगे।

सूत्रों के मुताबिक, गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यदि राहुल गांधी के आरोप साबित होते हैं तो वह इस्तीफा दे देंगे। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि पार्टी में सुधार को लिखा गया लेटर बीजेपी से मिलीभगत का नतीजा है। राहुल ने लेटर की टाइमिंग को लेकर भी सवाल उठाए। गुलाम नबी आजाद की सफाई से असंतुष्ट प्रियंका गांधी ने कहा कि जो आप कह रहे हैं वह उससे ठीक उलट है जो आपने लेटर में लिखा है।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने भी राहुल गांधी की कथित टिप्पणी को लेकर उनपर कटाक्ष करते हुए कहा कि उन्होंने पिछले 30 वर्षों में भाजपा के पक्ष में कोई बयान नहीं दिया, इसके बावजूद ‘हम भाजपा के साथ साठगांठ कर रहे हैं। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा, ”राहुल गांधी का कहना है कि ‘हम भाजपा के साथ साठगांठ कर रहे हैं।

राजस्थान उच्च न्यायालय में कांग्रेस पार्टी का पक्ष रखते हुए सफल हुआ। मणिपुर में भाजपा को सत्ता से बेदखल करने करने के लिए पार्टी का पक्ष रखा। पिछले 30 वर्षों से किसी मुद्दे पर भाजपा के पक्ष में कोई बयान नहीं दिया। फिर भी ‘हम भाजपा के साथ साठगांठ कर रहे हैं।” हालांकि, बाद में उन्होंने इस ट्वीट को हटा लिया और एक अन्य ट्वीट में लिखा कि राहुल गांधी ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से बताया है उन्होंने वह नहीं कहा, जो उनके हवाले से बताया गया है।

इस बीच पार्टी के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस बात से इनकार किया है कि राहुल गांधी ने लेटर लिखने वाले नेताओं पर बीजेपी से मिलीभगत का आरोप लगाया है। कपिल सिब्बल को टैग करते हुए ट्वीट किया है कि राहुल गांधी ने इस तरह का एक भी शब्द नहीं कहा है।

गुलाम नबी आजाद सहित दो दर्जन कांग्रेस नेताओं ने पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी से संगठन में बड़े बदलाव की मांग करते हुए उन्हें पत्र लिखा है। इन नेताओं ने शक्ति के विकेंद्रीकरण, प्रदेश इकाइयों के सशक्तिकरण और केंद्रीय संसदीय बोर्ड के गठन जैसे सुधार लाकर संगठन में बड़ा बदलाव करने का आह्वान किया है। वैसे, केंद्रीय संसदीय बोर्ड 1970 के दशक तक कांग्रेस में था लेकिन उसे बाद में खत्म कर दिया गया। इस पत्र में सामूहिक रूप से निर्णय लेने पर बल दिया गया है और उस प्रक्रिया में गांधी परिवार को ‘अभिन्न हिस्सा’ बनाने की दरख्वास्त की गई है।

इन नेताओं ने पूर्णकालिक नेतृत्व की नियुक्ति की भी मांग की है, जो सक्रिय हो और जिससे कार्यकर्ता और नेता आसानी से संपर्क कर सकें। समझा जाता है कि सुधार के पक्षधर नेताओं ने पार्टी संगठन में प्रखंड स्तर से लेकर कार्यसमिति के स्तर तक स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की भी मांग रखी है।

जिन नेताओं ने इस पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं उनमें राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद, कांग्रेस के उपनेता आनंद शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पृथ्वीराज चव्हाण, राजिंदर कौर भट्टल , पूर्व मंत्री मुकुल वासनिक, कपिल सिब्बल, एम वीरप्पा मोइली, शशि थरूर, सांसद मनीष तिवारी, पूर्व सांसद मिलिंद देवड़ा, जितिन प्रसाद, संदीप दीक्षित शामिल हैं। इस पत्र में पार्टी की इकाइयों के पूर्व प्रमुख राज बब्बर, अरविंदर सिंह लवली, कौल सिंह ठाकुर, अखिलेश प्रसाद सिंह और कुलदीप शर्मा के भी दस्तखत हैं।

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