महात्मा गाँधी के पोते का सुप्रीम कोर्ट पर बड़ा बयान कहा गोडसे को भी देशभक्त बता सकता है

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में अपना फैसला सुना दिया है,जिसको लेकर मुस्लिम पक्ष असंतुष्ट दिखाई दे रहा है,महात्मा गांधी के पड़पोते तुषार गांधी ने भी फैसले पर अपना असंतोष जाहिर किया है। उन्होंने ट्वीट करके सुप्रीम कोर्ट पर जमकर तंज कसा है।

हालांकि, उनकी टिप्पणी सोशल मीडिया यूजर्स के निशाने पर आ गई और लोगों ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। तुषार गांधी ने सुप्रीम कोर्ट पर तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि सर्वोच्च अदालत आज गोडसे को भी देशभक्त बता सकता है।

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने दशकों पुराने मुकदमे का निपटारा करते हुए अयोध्या में विवादित जगह को राम मंदिर के हवाले कर दिया। तुषार गांधी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर असंतोष जाहिर करते हुए कहा, “यदि गांधी (महात्मा गांधी) की हत्या के मामले की सुनवाई आज सुप्रीम कोर्ट में की जाती है, तो फैसला होता कि नाथूराम गोडसे हत्यारा है, लेकिन वह देशभक्त भी है।” तुषार गांधी ने अपने इस ट्वीट के जरिए उच्चतम न्यायालय के फैसले के प्रति अपना आक्रोश जाहिर किया है।

तुषार गांधी के इस ट्वीट के बाद यूजर्स ने उन्हें ट्रोल करना शुरू कर दिया। कई लोगों ने तुषार गांधी को उनके सरनेम का हवाला देते हुए ट्रोल किया, तो कइ लोगों ने नाथू राम गोडसे की सराहना करते हुए देशभक्त बताया। यूजर्स ने तुषार गांधी को सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ का हवला दिया भी दिया, जिसने 5-0 के सर्वसम्मति से अपना फैसला दिया है।

हालांकि, कुछ लोग ऐसे भी थे जो तुषार गांधी के ट्वीट के समर्थन में दिखाई दिए। कुछ यूजर्स ने बेहद मजाकिया अंदाज में तुषार गांधी के ट्वीट का समर्थन किया।

गौरतलब है कि शनिवार को दुनिया के सबसे पुराने मुकदमों में शुमार अयोध्या मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने 40 दिनों की मैराथन सुनवाई के बाद फैसला दे दिया। कोर्ट ने अयोध्या की विवादित जमीन पर रामलला विराजमान का अधिकार माना। जबकि, बाबरी मस्जिद के बदले मुस्लिम पक्ष को अयोध्या में दूसरी जगह 5 एकड़ जमीन सरकार से देने को कहा। चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली संविधान पीठ ने यह फैसला सर्वसम्मति से दिया।

अदालत ने अपने फैसले में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) का हवाला देते हुए माना कि बाबरी मस्जिद का निर्माण खाली जगह पर नहीं हुआ था। अदालत ने माना की विवादित जमीन के नीचे गैर-इस्लामिक ढांचे के अवशेष मिले हैं। हालांकि, कोर्ट ने इस दौरान यह भी कहा कि इसका कोई पुख्ता सबूत नहीं है कि मंदिर तोड़कर ही मस्जिद का निर्माण किया गया।

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