मस्जिद में नमाज पढ़ने को लेकर दारुल उलूम देवबंद ने सरकार को लिखा पत्र,जताया ऐतराज देखिए

नई दिल्ली: पूरी दुनिया में फैली हुई महामारी कोरोना वायरस संक्रमण से बचाव के मद्देनजर किए लॉकडाउन (Lockdown) को खोले जाने की प्रक्रिया क्रमबद्ध तरीके से चल रही है. जिसके अंतर्गत अब धार्मिक स्थलों को भी नियमों के दायरे में रहते हुए खोले जाने की अनुमति मिल गई गई है।

कोरोना संक्रमण को देखते हुए सरकार द्वारा मस्जिदों में एक साथ अधिकतम पांच लोगों को नमाज पढ़ने की अनुमति दी गई है. लेकिन सरकार के इस फैसले पर देवबंद के मुफ़्ती अबुल कासिम नोमानी (Abul Qasim Nomani) ने ऐतराज जताया है।

बता दें कि दारुल उलूम देवबंद (Darul Uloom Deoband) के मुफ्ती मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने सरकार को पत्र लिखकर नाराजगी जताते हुए कहा है कि ‘मस्जिद में 5 लोगों को ही नमाज पढ़ने की अनुमति मिलना यह ठीक नहीं है, क्योंकि पहले से ही 5 आदमी नमाज पढ़ते चले आ रहे हैं तो अब खुलने का क्या फायदा जब बाजारों को खोल दिया गया है और वहां सोशल डिस्टेंसिंग (Social distancing) का पालन नहीं हो रहा है तो मस्जिद को खोलने की भी इजाजत मिलनी चाहिए और वहां पर सोशल डिस्टेंसिंग का पूरा-पूरा पालन होगा’.

दारुल उलुम के प्रवक्ता अशरफ उस्मानी ने बताया दारुल उलूम देवबंद ने आज एक प्रेस नोट जारी करके कहा है कि भारत सरकार ने मस्जिद खोलने की जो शर्तों के साथ में इजाजत दी है पांच आदमियों के साथ में इजाजत दी है का नाम करना यह समझ में नहीं आता जब बाजार पूरे खुले हुए हैं बाजार में सोशल डिस्टेंसिंग का पालन नहीं हो रहा है तो मस्जिद के अंदर भी इजाजत होनी चाहिए ।

मौलाना अबुल कासिम नोमानी ने दारुल उलूम देवबंद की तरफ से सरकार से मांग की है, सरकार इस पर दोबारा गौर करें और बगैर तादात की बंदिश के सोशल डिस्टेंसिंग के साथ मस्जिद में लोगों को नमाज पढ़ने की इजाजत दे।

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