मशहूर गायिका शाजिया ने संगीत से करी तौबा-कहा इस्लामी तालीमात पर चलकर ज़िन्दगी गुज़ारुँगी

नई दिल्ली: दुनियाभर में अपनी गायिका की धूम मचाने वाली मशहूर गायकार शाजिया खश्क ने शोबिज को अलविदा कहते हुए मीडिया से बातचीत करते हुए कहा है कि अब गाना नही गाएंगी,शाजिया पाकिस्तान में बहुत लोकप्रिय गायिका है।

पाकिस्तान की नेशनल मीडिया के अनुसार ‘लाल मेरी पत.’ और ‘दाने पे दाना.’ जैसे कई मशहूर गानों की गायिका खश्क ने कहा है कि वह अब शोबिज छोड़ रहीं हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने गायिकी छोड़ने का फैसला इसलिए किया क्योंकि वह अब अपनी जिंदगी पूरी तरह से इस्लामी शिक्षा के अनुरूप जीना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि मैं फैसला कर चुकी हूं. मुझे अब अपनी बाकी की जिंदगी इस्लाम की सेवा में बितानी है।

उन्होंने अब तक उनका समर्थन करने के लिए प्रशंसकों को धन्यवाद दिया और कहा कि उन्हें उम्मीद है कि उनके ताजा फैसले का भी प्रशंसक समर्थन करेंगे. उन्होंने कहा कि वह अपने फैसले को नहीं बदलेंगी और शोबिज में वापस कदम नहीं रखेंगी।

रिपोर्ट में कहा गया है कि सिंध से ताल्लुक रखने वाली शाजिया ने सिंधी के साथ-साथ उर्दू, पंजाबी, बलोची, सराइकी और कश्मीरी भाषाओं में भी गीत गाए. वह दुनिया के 45 देशों में अपने शो कर चुकी हैं . उनकी पहचान एक सूफी गायिका के साथ-साथ एक सिंधी लोक कलाकार के रूप में भी रही है।

भारत में भी हिंदी फिल्म अभिनेत्री जायरा वसीम ने धर्म के लिए फिल्मी दुनिया छोड़ दी थी. जायरा वसीम ने फेसबुक पोस्ट लिखकर बॉलीवुड छोड़ने का ऐलान किया था।

जायरा ने लिखा था कि 5 साल पहले मैंने एक ऐसा फैसला लिया, जिसने मेरी जिंदगी को हमेशा के लिए बदल दिया. जब मैंने ऐसे माहौल में काम करना जारी रखा जो लगातार मेरे ईमान में दखल दे रहा था, तो मेरे धर्म के साथ मेरा रिश्ता खतरे में पड़ गया था।

लेकिन मैं इस बात को इग्नोर करते हुए अपना काम कर रही थी और खुद को इस बात के लिए मना रही थी कि जो मैं कर रही हूं वो सब सही है. इससे मुझे फर्क नहीं पड़ रहा है. लेकिन मेरी जिंदगी से बरकत पूरी तरह से खत्म हो गई. बरकत सिर्फ आपकी जिंदगी की खुशियों और अच्छी जिंदगी को ही नहीं दर्शाती है बल्कि ये जीवन में ठहराव और सुकून से भी जुड़ी है।

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