बिहार चुनाव में ओवैसी का पूर्व मुख्यमंत्री से गठबंधन ?लालू-नीतीश के लिये बनेगा मुसीबत,देखिए

नई दिल्ली: बिहार विधानसभा चुनाव से पहले एक नये गठबंधन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है जिससे कई बड़े राजनीतिक दलों का खेल बिगड़ सकता है,क्योंकि बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी और असदउद्दीन ओवैसी के बीच हाथ मिलाने के संकेत मिल रहे हैं जो बिहार की राजनीति के लिये बहुत बड़ा काम होगा।

ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तिहादुल मुस्लिमीन के बिहार यूनिट के अध्यक्ष अख्तरुल ईमान ने मांझी से पहली औपचारिक मुलाकात शुक्रवार को उनके आवास पर हुई. जानकारी के मुताबिक दोनों दलों के बीच इस बात को लेकर सहमति बनी है कि बिहार की सभी 243 सीटों पर चुनाव लड़ा जाएगा।

ऑल इण्डिया मजलिस ऐ इत्तिहादुल मुस्लिमीन के प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल इमान ने कहा, “जीतन राम मांझी के साथ मेरी निजी मुलाकात थी और मैं उन्हें पहले से जानता हूं. मांझी हमारे साथ किशनगंज की रैली में भी साथ आने के लिए तैयार हो गए थे मगर आखिरी वक्त पर किसी वजह से नहीं आए.”

हालांकि, सीटों के बंटवारे को लेकर अभी दोनों दलों के बीच में कोई बात नहीं हुई है. बता दें, 2019 में सीएए और एनआरसी के खिलाफ असदुद्दीन ओवैसी और जीतन राम मांझी किशनगंज में एक साथ मंच साझा कर एक रैली करने वाले थे मगर आखिरी मौके पर जीतन राम मांझी ने अपने कदम वापस खींच लिए. माना जा रहा है कि महागठबंधन में तवज्जो नहीं मिलने के कारण दबाव की राजनीति के तहत जीतन राम मांझी ने असदुद्दीन ओवैसी के साथ मंच साझा करने के लिए हामी भरी थी।

हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा के प्रवक्ता दानिश रिजवान ने कहा, “राजनीति में कब कौन किसके साथ गठबंधन करेगा यह कहना मुश्किल है मगर फिलहाल यह कहना जल्दबाजी है कि हमारा गठबंधन ओवैसी की पार्टी के साथ हो रहा है. ऐसी कोई बात नहीं है.”

जीतन राम मांझी के असदुद्दीन ओवैसी के साथ मंच साझा करने की खबरों के बाद बिहार के राजनीतिक गलियारे में हड़कंप मच गया था. ओवैसी की पार्टी ने पहले ही ऐलान कर दिया है कि वह बिहार में इस बार ज्यादा से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ेगी. पहले चरण में पार्टी ने अपने 32 उम्मीदवारों के नाम की घोषणा भी कर रखी है।

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