बाबरी मस्जिद केस का बैरिस्टर असदउद्दीन ओवैसी की कोठी से क्या कनेक्शन है ?जानकर हैरानी होगी

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के जनपद फैज़ाबाद जो अब आयोध्या बन चुका है में मस्जिद और मंदिर को लेकर दो दशकों से ज़्यादा समय से कानूनी लड़ाई चल रही है,सर्वोच्च अदालत में लड़ाई लड़ रहे पक्षकारों में से कई का हाल यह है कि सुनवाई के लिए वे हफ्ता-हफ्ता भर दिल्ली में रहते हैं पर उनके लिए सुकून की बात ये है कि वे यहां रहने, खाने की चिंता से मुक्त हैं।

मुस्लिम पक्षकारों के लिए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के अध्यक्ष और हैदराबाद से सांसद असदउद्दीन ओवैसी का घर कानूनी लड़ाई के दौरान दिल्ली में ठहरने का ठिकाना बन गया है और ये सिलसिला पिछले एक दो नहीं बल्कि 25 वर्षों से ज्यादा से चल रहा है. हर बार सुनवाई के लिए मुस्लिम पक्षकार जब दिल्ली पहुंचते हैं तो उनका आशियाना ओवैसी का 34 अशोक रोड स्थित बंगला बनता है. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट में चल रही सुनवाई अंतिम फेज में है।

मुस्लिम परस्त नेता के रूप में यूं तो ओवैसी की छवि बनाई जा चुकी है, लेकिन बाबरी मस्जिद की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्षकार बने वकील जफरयाब जिलानी को शरण देने के लिए वह धर्म या राजनीति का हवाला नहीं देते. बल्कि अपने पिता सुल्तान सलाहुद्दीन ओवैसी के किए गए वादे को निभाना इसकी वजह बताते हैं।

असल में ओवैसी के पिता ने जफरयाब जिलानी से वादा किया था कि दिल्ली में केस की सुनवाई के लिए वे जब भी आएं रुकने का बंदोबस्त हम करेंगे. ओवैसी अपने पिता के इसी वादे को आगे बढ़ा रहे हैं. अब जबकि मंदिर मस्जिद की लड़ाई में अदालत में रोज़ सुनवाई हो रही है तो मुस्लिम पक्षकारों का स्थाई ठिकाना ओवैसी की कोठी बनी हुई है.

सांसद ओवैसी इस संबंध में कुछ कहना नहीं चाहते. दिप्रिंट से बातचीत में उनका कहना था कि ‘जिलानी जी मेरे मरहूम पिता के खास दोस्त थे और अपने घर पर रहने वाले किसी मेहमान के बारे में मै कुछ कहना नहीं चाहूंगा. ये हैदराबादी तहज़ीब के खिलाफ है. और इस पर बोलना बड़ों का असम्मान होगा.’

इस मामले में वरिष्ठ वकील जफरयाब जिलानी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि ‘अशोक रोड स्थित यह कोठी 1984 से ओवैसी के पिता के पास है. 1993 से हम लोग ओवैसी के घर में ठहर रहे हैं. ओवैसी के पिता ने हमसे कहा था कि जब भी बाबरी मस्जिद के तालुक्क से आप दिल्ली आएं मेरा घर आपके लिए हाज़िर है. यहां पर हमारे और सहयोगियों के लिए खाने और ठहरने की पूरी व्यवस्था है. घर का एक कमरा हमारे लिए विशेष तौर पर रखा गया है’

जिलानी बताते हैं, ‘हमारी कोर्ट में सुनवाई चल रही होती है तो इस दौरान कभी संसद का सत्र होता है या कोई बैठक होती है तो सांसद असदुद्दीन ओवैसी दिल्ली अपने घर आते हैं. उस दौरान भी हम लोग उनके साथ ही रहते हैं. एक साथ ही खाना खाते हैं. घर में एक ही बैठक कक्ष में हम सब लोग बैठकर अपना काम करते हैं. सांसद ओवैसी भी वहीं लोगों से मिलते हैं.’

जिलानी का कहना, ‘एक कमरा हमारे लिए रखा हुआ है. इसमें कोई नहीं रहता है. जब कभी घर में मेहमान ज्यादा आ जाते हैं तो एक हॉल में सबके ठहरने की व्यवस्था की जाती है.’

जिलानी के मुताबिक, ‘ओवैसी भी वकील हैं. वह समय समय पर कोर्ट में चल रही सुनवाई के बारे में पूछते हैं. हम सब साथ बैठक कर आगे की सुनवाई को लेकर चर्चा भी करते हैं.’

सुप्रीम कोर्ट से नवंबर मध्य तक मामले पर फैसला आने की उम्मीद है, जिसके बाद एआईएमआईएम प्रमुख ओवैसी आराम से रह सकते हैं कि उन्होंने अपने पिता का वादा निभाया

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