दारुल उलूम देवबंद का बड़ा फैसला इस वर्ष नहीं होगा किसी भी नए छात्र का दाखिला,जानिए क्यों ?

नई दिल्ली: विश्वविख्यात दीनी मदरसे दारुल उलूम देवबंद ने कोरोना महामारी को देखते हुए अपनी तमाम वार्षिक परीक्षाओं को निरस्त कर दिया है। यह भी निर्णय लिया गया है कि नए शिक्षण सत्र के लिए भी प्रवेश परीक्षाएं नहीं होंगी।

कोरोना वायरस के चलते दारुल उलूम देवबंद के मैनेजमेंट ने अप्रैल के प्रथम सप्ताह में होने वाली संस्था की वार्षिक परीक्षआों को स्थगित कर दिया है। संस्था ने छुट्टी घोषित कर दी थी। इसके बाद अधिकतर छात्र अपने घरों को लौट गए थे।

देश की सबसे बड़ी इस्लामिक शिक्षण संस्था में वार्षिक परीक्षाएं समपन्न कराने के लिए कोरोना का प्रकोप समाप्त होने की प्रतीक्षा की जा रही थी। लेकिन देश में कोरोना का प्रकोप रुकने का नाम नहीं ले रहा है। इसके चलते दारुल उलूम में हुई मजलिस ए तालीम (शिक्षा विभाग की बैठक) में वार्षिक परीक्षाएं निरस्त करने का अहम फैसला लिया गया है।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया है कि समस्त कक्षाओं में अर्धवार्षिक परीक्षाओं के आधार पर ही छात्र प्रोन्नत होकर अगली कक्षाओं में प्रवेश करेंगे। इसके अलावा संस्था के नए शिक्षण सत्र के लिए मई की अंतिम तिथियों में होने वाली प्रवेश परीक्षाओं को भी निरस्त कर दिया गया है।

इससे यह साफ हो गया है कि इस वर्ष दारुल उलूम देवबंद में किसी भी नए छात्र का दाखिला नहीं होगा। दारुल उलूम देवबंद के शिक्षा विभाग के प्रभारी मौलाना खुर्शीद ग्यावी ने मजलिस—ए— तालीमी द्वारा लिए गए उक्त फैसले की पुष्टि की है। हालांकि, अभी दारुल उलूम ने इस संबंध में लिखित आदेश जारी नहीं किए हैं।

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