तुर्की को समुद्र में मिला अरबों डॉलर का खजाना-एर्दोगान के ऐलान से बढ़ी इन देशों की मुश्किलें,देखिए

नई दिल्ली: तुर्की राष्ट्रपति रजब तैयब एर्दोगान ने ऐलान किया है कि उन्‍हें काला सागर तट के पास में 320 अरब क्‍यूबिक मीटर प्राकृतिक गैस के भंडार मिले हैं। उन्‍होंने कहा, ‘तुर्की ने काला सागर में अब तक के सबसे बड़े गैस के भंडार की खोज की है।’ राष्‍ट्रपति ने कहा कि इस प्राकृतिक गैस का उत्‍पादन वर्ष 2023 से होने लगेगा। हालांकि गैस की यह खोज तुर्की के पहले के अनुमान से काफी कम है।

इस खोज के बाद अब तुर्की की गैस के लिए विदेशी निर्भरता और कम हो जाएगी। तुर्की के ड्रिलिंग शिप फेथ ने इस गैस काला सागर में पता लगाया है। एर्दोगान ने कहा, ‘हम आशा करते हैं कि भूमध्‍य सागर से इस तरह की और ज्‍यादा अच्‍छी खबर आएगी। हम वहां पर अपनी गतिविधियों को और ज्‍यादा तेज करेंगे… साथ ही खुदाई का काम जारी रखेंगे।’ हालांकि अभी इस गैस को निकालने में अरबों डॉलर का निवेश करना होगा।

तुर्की का ड्रिलिंग शिप फेथ जुलाई से ही खुदाई जोन में लगा हुआ था। इसे टूना-1 नाम दिया गया है। यह काला सागर में तुर्की के तट से 100 नॉटिकल मील दूर स्थित है। तुर्की के ऊर्जा मंत्री फेथ डोनमेज ने कहा कि गैस की यह खोज नौंवी बार खुदाई के बाद हुई है। उन्‍होंने कहा, ‘वैज्ञानिक डेटा से यह पता चलता है कि इसी तरह के भंडार की दो और परत नीचे है। अभी हम 3500 मीटर की गहराई में हैं और दूसरे महत्‍वपूर्ण रिजर्व को काटा है।’

व‍िशेषज्ञों का कहना है कि अगर तुर्की इस गैस को निकालने में कामयाब हो जाता है तो उसे रूस से बेहद महंगी गैस का आयात नहीं करना पड़ेगा। इसी वजह से पिछले दिनों एर्दोगान ने संकेत दिया था कि देश के विकास में नए सूरज का उदय होने वाला है। तुर्की रूस की गैस पर बुरी तरह से निर्भर है और वह नए सप्‍लायर तलाश रहा है। पिछले साल ही उसने करीब 41 अरब डॉलर का गैस खरीदा था। अगर तुर्की रूस से कम गैस खरीदता है तो मास्‍को को बड़ा झटका लगेगा।

तुर्की के राष्‍ट्रपति चाहे जो भी दावा करें लेकिन व‍िशेषज्ञों का कहना है कि तुर्की के उम्‍मीद से कम गैस मिली है। इससे पहले तुर्की ने दावा किया था कि उसे अगले दो दशक तक के लिए गैस मिल गई है। इससे ज्‍यादा बड़ा गैस भंडार मिस्र को मिला है। माना जा रहा है कि मिस्र का गैस भंडार 850 अरब क्‍यूबिक मीटर है।

तुर्की को यह गैस भंडार ऐसे समय पर मिला है जब उसका यूनान के साथ पूर्वी भूमध्‍य सागर में तेल और गैस की खुदाई को लेकर विवाद चल रहा है। तुर्की के र‍िसर्च जहाज भेजने के बाद यूनान ने वहां पर अपना युद्धपोत भेज दिया था। तुर्की और यूनान दोनों ही नाटो के सदस्‍य देश हैं।

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