खुद भारत के लिये नही खेल सका तो नौशाद खान ने अपने तीन बेटों को बनाया क्रिकेटर-बड़े बेटे ने जड़ा तिहरा शतक

नई दिल्ली: रणजी ट्रॉफी में मुंबई की तरफ से खेलने वाले युवा क्रिकेटर सरफराज खान ने दो मैचों में जबरदस्त प्रदर्शन करके तहलका मचा दिया है और सबका ध्यान अपनी तरफ खींचने का काम किया है क्योंकि इस 22 वर्षीय खिलाड़ी ने दो हफ्ते के अंदर एक तिहरा और एक दोहरा शतक ठोका और दोनों पारियों में नाबाद रहे।

सरफराज खान मुंबई के उपनगरीय कुर्ला इलाके का रहने वाला है,सरफराज खान के पिता नौशाद खान ने अपनी पूरी जिंदगी क्रिकेट को ही समर्पित कर दी है। नौशाद का सपना था कि वह भारत के लिए इंटरनैशनल लेवल पर खेलें, लेकिन यह सपना साकार नहीं हो सका।

यहां तक कि उन्हें मुंबई के लिए रणजी ट्रोफी मैच खेलने तक का मौका नहीं मिला। हां, वह मुंबई रणजी टीम के संभावितों में अक्सर शामिल किए जाते रहे। उन्होंने ठान ली कि भले ही मैं देश के लिए नहीं खेल सका लेकिन मैं अपने तीनों बच्चों को ऐसा बनाऊंगा कि वे एक दिन देश के लिए जरूर खेलेंगे।

नौशाद की बरसों की कड़ी मेहनत और लगन का ही नतीजा है कि उनके सबसे बड़े बेटे सरफराज इन दिनों रणजी ट्रोफी में पहले ट्रिपल सेंचुरी और बाद में डबल सेंचुरी जड़कर रातोंरात फिर से लाइमलाइट में आ गए हैं। उनके दूसरे नंबर के बेटे 21 वर्षीय मोइन हैं जो क्लब लेवल पर क्रिकेट खेलते हैं, जबकि तीसरे और सबसे छोटे बेटे 15 वर्षीय मुशीर फिलहाल मुंबई की अंडर-19 टीम के लिए कूच बिहार ट्रोफी में खेल रहे हैं। क्रिकेट जगत की इस खान फैमिलों के सदस्यों की रग-रग में क्रिकेट बसा है।

नौशाद वैसे पले-बढ़े मुंबई में हैं लेकिन वह मूल रूप से यूपी के आजमगढ़ जिले से हैं। उन्होंने क्रिकेटर बनने के लिए खूब पसीना बहाया लेकिन बड़े लेवल पर कोई मौका नहीं मिला। रेलवे में स्पोर्ट्स कोटे में नौकरी मिल गई लेकिन नौशाद का क्रिकेट से नाता टूटने वाला कहा था। उन्होंने अपने बच्चों को क्रिकेट का ककहरा सिखाना शुरू किया।

नौशाद ने कहा कि मैं अपने बच्चों के साथ पिता के रूप में कम, कोच के तौर पर ज्यादा पेश आता हूं और वो भी सख्ती से। सख्ती दिखाना जरूरी है क्योंकि जरा-सी ढिलाई उनके करियर के लिए नुकसानदेह साबित हो सकती है। तीनों बच्चों की ट्रेनिंग में कोई बाधा पैदा न हो इसलिए मैंने 2 वर्ष पहले रेलवे से वीआरएस ले लिया। यही नहीं घर के बगल में ही एक सीमेंटेड पिच भी बनवा दी ताकि प्रैक्टिस नियमित चलती रहे।

सरफराज वैसे किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। वह स्कूल के दिनों में इंटर स्कूल क्रिकेट टूर्नमेंट के एक मैच में 400 प्लस रन की पारी खेलने के अलावा बेंगलुरु और पंजाब टीम के लिए आईपीएल और मुंबई के अलावा यूपी के लिए रणजी ट्रोफी मैच खेल चुके हैं।

इन दिनों वह इसलिए चर्चा में हैं क्योंकि उन्होंने 2 साल के कूलिंग ऑफ पीरियड के बाद मुंबई टीम में वापसी की है और वो भी दमदार तरीके से। उन्होंने 19 जनवरी को अपनी पूर्व टीम यूपी के खिलाफ रणजी ट्रोफी मैच के चौथे और अंतिम दिन ट्रिपल सेंचुरी (नॉटआउट 301 रन) बनाई। अगले ही मैच में उन्होंने हिमाचल के खिलाफ पहले दिन नॉटआउट 226 रन बना डाले।

15 बरस के मुशीर ने मुंबई की अंडर-16 टीम से अंडर-19 टीम का सफर काफी कम समय में तय किया है। इस सीजन मुंबई को अंडर-16 विजय मर्चेंट ट्रोफी का चैंपियन बनाने में मुशीर का अहम रोल रहा। उन्होंने अपनी लेग स्पिन बोलिंग से केवल 4 मैचों में 30 विकेट चटकाए और 1 हाफ सेंचुरी सहित 125 रन बनाए। मुंबई अंडर-19 टीम के लिए पहली बार खेलने का मौका उन्हें मौजूदा कूच बिहार ट्रोफी के क्वॉर्टर फाइनल मैच में बंगाल के खिलाफ मिला। बुधवार को खत्म हुए इस मैच में मुशीर ने 1 विकेट लेने के अलावा 27 रन बनाए।

मोइन क्लब क्रिकेट में सक्रिय हैं। संडे को जब मुशीर मुंबई अंडर-19 के लिए अपना पहला मैच खेल रहे थे उसी वक्त मोइन यंग कॉमरेड शील्ड टूर्नमेंट में यंग मोहम्मडन क्रिकेट क्लब के लिए मुंबई पुलिस जिमखाना के खिलाफ मैच खेल रहे थे। मोइन ने इस मैच में नॉटआउट 106 रन की पारी खेली। उनकी टीम हालांकि मैच 9 रन से हार गई।

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