तुर्की की राजधानी में तय्यब एर्दोगान को लगा तगड़ा झटका,पूर्ण मतदान के बाद भी हारे चुनाव,देखिए

नई दिल्ली: तुर्की के राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान को राजधानी इस्तांबुल के मेयर पद के लिये होरहे चुनाव में तगड़ा झटका लगा है,क्योंकि उनके प्रत्याशी को एक बार फिर हार का सामना करना पड़ा है

सेक्युलर रिपब्लिकन पीपुल्स पार्टी (सीएचपी) के उम्मीदवार इकरम इमामोग्लू ने 53.86 प्रतिशत मत लिये तथा सत्ताधारी पक्ष के प्रत्याशी बिनाली येल्दीरम को मात्र 45.23 प्रतिशत मत प्राप्त हुए हैं।25 साल में यह लगातार दूसरा मौका है जब तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल पर राष्ट्रपति रजब तय्यब एर्दोगान और उनकी पार्टी को नियंत्रण खोना पड़ा है।

सत्ताधारी एके पार्टी के उम्मीदवार बिनाली युल्दरम (63) ने इकरम इमामोग्लू को जीत की बधाई देते हुए शहर की बेहतरी के लिए काम करने की आशा जताई है. उन्होंने कहा कि तुर्की में लोकतंत्र को कोई खतरा नहीं है।

इस्तांबुल के एक करोड़ से ज्यादा मतदाताओं ने मेयर पद के लिए वोटिंग की है. मार्च में हुए मेयर पद के लिए चुनाव में विपक्षी सीएचपी पार्टी के उम्मीदवार इकरम इमामोग्लू को आश्चर्यजनक रूप से जीत मिली थी. हालांकि तुर्की चुनाव बोर्ड ने अनियमितता को आधार बनाकर इस चुनाव को रद्द कर दिया था. जिसके बाद दोबारा चुनाव करवाया गया. सत्ताधारी एकेपी पार्टी ने चुनाव में धांधली का आरोप लगाया था।

इस्तांबुल तुर्की की आर्थिक और सांस्कृतिक राजधानी है. यहां पर डेढ़ करोड़ लोग रहते हैं. यह तुर्की की जीडीपी में 31 फीसदी योगदान देता है. खुद रैचप तैय्यप एर्दोआन मानते हैं कि जो इस्तांबुल जीतेगा वही तुर्की की सत्ता में आएगा. एर्दोआन ने भी साल 1994 में तुर्की के मेयर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत की थी।

इमामोग्लू इस बार ‘लोकतंत्र की लड़ाई’ लड़ रहे थे और चुनाव पूर्व सर्वेक्षणों में उन्हें दूसरी बार भी पूर्व प्रधानमंत्री बिनाली युल्दरम से आगे हुए दिखाया गया था।

बिनाली युल्दरम (63) एर्दोआन की एके पार्टी के संस्थापक भी हैं. युल्दरम साल 2016 से 2018 के बीच तुर्की के प्रधानमंत्री रह चुके हैं. राष्ट्रपति प्रणाली आने के बाद उन्होंने पद छोड़ दिया था. वह परिवहन और संचार मंत्री रह चुके हैं. उन्हें फरवरी में नई संसद के लिए स्पीकर चुना गया था।

युल्दरम के लिए दोबारा चुनाव करवाने को न्यायसंगत ठहराने में मुश्किलों का सामना करना पड़ा. शहर की संरचना के विकास का उनका चुनावी मुद्दा जनता को पसंद नहीं आया।

इमामोग्लू ने शहरी गरीबी को इस चुनाव में मुद्दा बनाया. उन्होंने सार्वजनिक ठेके से सत्तासीन पार्टी के समर्थकों को फायदा देने का आरोप लगाया है।

जोखिमों का विश्लेषण करने वाली फर्म टेनेको इंटेलिजेंस के वोल्फ पिकोली कहते हैं कि दूसरी बार मिली हार रैचप तैय्यप एर्दोआन के लिए बड़ी मानहानि की बात होगी. वह आगे कहते हैं कि 20 साल बाद पहली बार एर्दोआन को इमामोग्लू के रूप में राजनैतिक चुनौती मिली है।

इस चुनाव में रिपब्लिकन पिपुल्स पार्टी, सीएचपी, अर्दोआन की पार्टी जस्टिस एंड डेवलपमेंट पार्टी(एके पार्टी) दोनों उम्मीदवारों में से किसी न किसी उम्मीदवारों का समर्थन किया है।

एसोसिएट प्रेस के मुताबिक पूरे शहर में दोनों नेताओं के पोस्टर लगे हैं और रोज बड़ी रैलियों का आयोजन किया गया. मतदान के खत्म होने के बाद स्थानीय मीडिया कवरेज पर लगी रोक को खत्म कर दिया गया है।

पिछली बार इकरम इमामोग्लू ने 13,000 वोट से चुनाव जीता था. तब उन्होंने तुर्की की सत्तासीन एके पार्टी पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।

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