डॉक्टर जाकिर नाईक के समर्थन में आया मलेशिया का प्रधानमंत्री, भारत को सौंपने पर देखिए क्या कहा ?

नई दिल्ली: विश्व प्रसिद्ध भारतीय इस्लामिक स्कॉलर के बारे में मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने कहा है कि उनके देश के पास जाकिर नाइक को भारत को प्रत्यर्पित नहीं करने का अधिकार है क्योंकि जाकिर का दावा है कि देश वापस लौटने के बाद उस पर निष्पक्ष मुकदमा नहीं चलाया जाएगा।

डॉक्टर जाकिर नाईक 2016 में भारत से भाग गया था और बाद में मुस्लिम बहुल देश मलेशिया चला गया था, जहां उसे स्थायी निवासी का दर्जा दिया गया. ‘द स्टार’ समाचार पत्र ने महातिर के हवाले से कहा, “जाकिर को लगता है कि उन पर (भारत में) निष्पक्ष मुकदमा नहीं चलाया जाएगा.”

उन्होंने इस मामले के हालात की तुलना मंगोलियाई मॉडल की हत्या को लेकर 2015 में मलेशिया में मौत की सजा पाए पूर्व पुलिस कमांडो सिरुल अजहर उमर के मामले से की, जिसे ऑस्ट्रेलिया ने प्रत्यर्पित करने से इनकार कर दिया था. प्रधानमंत्री ने कहा, “हमने ऑस्ट्रेलिया से सिरुल को प्रत्यर्पित करने का अनुरोध किया और उन्हें डर है कि कहीं हम उसे फांसी पर न लटका दें.”

नाइक ने एक बयान में कहा कि वह सरकार उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराने के लिए इंटरपोल पर दबाव बना रही है। नाईक 2016 में भारत छोड़ कर भाग गया था। उसने दावा किया कि यह उसे फंसाने के व्यापक अभियान का हिस्सा है। लेकिन कुछ सदस्य देशों से पुष्टि करने के बाद, वह दावा कर सकता है कि अभी उसके खिलाफ कोई रेड कॉर्नर नोटिस जारी नहीं हुआ है।

अपनी जांच रिपोर्ट में ईडी ने कहा है कि आईआरएफ के कई बैंक खाते हैं, जिसमें दानकर्ताओं की तरफ से दिए जाने वाले चंदे जमा किए जा रहे थे और इनका नियंत्रण खुद 53 वर्षीय जाकिर अब्दुल करीब नाइक (नाइक का पूरा नाम) के हाथों में था। पीटीआई-भाषा ने ईडी की जांच रिपोर्ट देखी है।

रिपोर्ट में कहा गया, ”यह बैंक खाते सिटी बैंक, डीसीबी बैंक लिमिटेड और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया में हैं। आईआरएफ द्वारा प्राप्त की गई ज्यादातर धनराशि घरेलू एवं विदेशी दानकर्ताओं की तरफ से चंदे या ज़कात के रूप में हैं। यह धनराशि बैंकिंग माध्यमों के जरिए प्राप्त की गई थी। बताया जाता है कि जांच से भाग रहा नाइक अभी मलेशिया में है।

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