कंगाल हुआ पाकिस्तान,रमजान में कमरतोड़ महँगाई झेल रही जनता,154 रुपये तक पहुंचा डॉलर,देखिए

नई दिल्ली: पड़ोसी देश पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति डाँवाडोल है,पाकिस्तानी रुपये ने गिरवाट के अपने सारे रिकॉर्ड तोड़ डाले हैं,जिसके बाद कमर तोड़ महँगाई का जनता को सामना करना पड़ रहा है,पिछले दिनों भारतीय रुपये की गिरावट भी दर्ज हुई थी और रुपया डॉलर के मुकाबले 74 रुपये तक पहुंच गया था।

पाकिस्तान में अमेरिकी डॉलर बीते एक साल में 100 रुपए से बढ़ते हुए सोमवार को अब तक के उच्चतम 154 पाकिस्तानी रुपए तक पहुंच गया है। पाकिस्तान द्वारा आईएमएफ से कर्ज लिए जाने के बाद से पाकिस्तानी रुपया लगातार गिर रहा है और बीते 12 दिनों में 140 रुपए से 154 रुपए तक पहुंच गया है। बंद होने के समय डॉलर 153.50 पाकिस्तानी रुपए का था।

इसी वित्त वर्ष में रुपया अपना 21 फीसदी मूल्य खो चुका है, जिसके चलते महंगाई भी बढ़ती जा रही है क्योंकि डॉलर महंगा होने से आयात लगातार महंगा होता जा रहा है। डॉलर महंगा होने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों को भी बढ़ाया जा रहा है। क्रूड के दाम बढ़ने का असर भी तेल की कीमतों पर है। इन सब के चलते महंगाई बढ़ती जा रहा है और ये अब दोहरे अंकों में पहुंच चुकी है।

जानकारों का कहना है कि डॉलर जून महीने में 160 रुपए का स्तर भी छू सकता है। आईएमएफ ने कर्ज देने से पहले पाकिस्तान को डॉलर पर कंट्रोल खत्म करने की शर्त रखी थी और उसे बाजार के वास्तविक मूल्यों पर रखने की बात रखी। इससे पहले सोमवार को स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान ने ब्याज दरों में भी 150 बेसिस प्वाइंट्स की बढ़ोतरी करते हुए उन्हें 12.25 फीसदी तक पहुंचा दिया।

विदेश में डॉलर ले जाने की सीमा कम होगी
लगातार कम होता विदेशी मुद्रा भंडार अब 8.50 बिलियन डॉलर तक रह गया है। ऐसे में पाकिस्तान सरकार विदेश जाने के समय पाकिस्तानियों को सिर्फ 3 हजार डॉलर साथ लेकर जाने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। वर्तमान सीमा 10 हजार डॉलर की है।

वित्त वर्ष 18-19 में पाकिस्तान ने जीडीपी का लक्ष्य 6.2 फीसदी तय किया था लेकिन वास्तव में जीडीपी 3.3 फीसदी ही रह गई। चालू वित्त वर्ष में ये 2.50 से 3 फीसदी के बीच रहने का अनुमान है। कृषि में ग्रोथ 3.9 फीसदी का लक्ष्य था लेकिन ग्रोथ 0.85 फीसदी ही रह गई। वहीं इंडस्ट्री में 7.6 फीसदी का लक्ष्य था लेकिन ग्रोथ 1.4 फीसदी ही रही। सर्विस सेक्टर में लक्ष्य 6.5 फीसदी था लेकिन ग्रोथ 4.7 फीसदी रही।

पाकिस्तान ने बीते साल में 60 बिलियन डॉलर का आयात किया और निर्यात सिर्फ 24 अरब डॉलर का रहा। विदेशों में बसे पाकिस्तानी अगर अपने परिवारों को 16 बिलियन डॉलर ना भेजते तो पाकिस्तान इस समय दिवालिया हो चुका होता। इस समय पाकिस्तान की इकोनॉमी पूरी तरह से चीन, सऊदी अरब, यूएई आदि देशों से मिल रहे कर्ज पर ही निर्भर है।

आईएमएफ ने भी 6 बिलियन डॉलर अगले तीन सालों में देने का करार किया है। ऐसे में पाकिस्तान को निकट भविष्य में राहत मिलती नजर नहीं आ रही है। पाकिस्तान के पास इस समय तीन महीने के आयात का बिल चुकाने के ही पैसे बचे हैं।

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