उलेमा का सहारा लेकर मंसूर खान ने इस्लामिक बैंकिंग के नाम पर दो हजार करोड़ रुपये ठगे,देखिए

नई दिल्ली: इस्लामिक बैंकिंग के नाम पर मॉनेटरी एडवाइजरी ज्वेलर्स(IMA) के मालिक ने मंसूर खान ने अरबों के घोटाले करके देश छोड़कर दुबई भाग गया है,इसके बाद अब एक ताज़ा मामला सामने आया है कि मंसूर ने धर्म के नाम पर लोगों से अरबों रुपयों की ठगी करी है,केंद्रीय अपराध शाखा(सीसीबी) ने मंसूर खान की तीन पत्नियों के घरों पर छापा मारकर कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, जूलरी और नकदी जब्त की है।

सीसीबी ने मंसूर खान की पहली पत्नी के शिवाजी नगर स्थित आवास पर छापा मारा, जबकि उनकी दूसरी और तीसरी पत्नी के तिलक नगर स्थित आवास पर छापा मारा. अभी तक की जानकारी के मुताबिक सीसीबी के अधिकारियों ने इस दौरान मंसूर की पत्नियों के घर से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज के साथ ही 1.5 किलोग्राम सोना और 2.7 लाख रुपये नकदी जब्त की है।

गौरतलब है कि इस्लामिक बैंक के नाम पर करीब 30 हजार मुस्लिमों के साथ धोखाधड़ी करने वाले मोहम्‍मद मंसूर खान ने 200 करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला किया है. आईएमए के खिलाफ अब तक 38 हजार निवेशकों ने शिकायत दर्ज करा दी है. कर्नाटक सरकार ने मामले की जांच के लिए 11 सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआइटी) का गठन किया है. आईएमए मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग को लेकर भी निवेशकों का प्रदर्शन तेज होता जा रहा है. बताया जाता है कि हाईकोर्ट में अबतक 18 याचिकाएं दायर की जा चुकी हैं. कंपनी में निवेश करने वालों में आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और तमिलनाडु के भी बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं।

कर्नाटक पुलिस ने एसआईटी का गठन कर इस मामले की जांच शुरू कर दी है. बता दें कि मोहम्मद मंसूर खान ने इस्लामिक बैंक के नाम पर मुस्लिम लोगों को बड़े रिटर्न का वादा कर एक फर्जी स्कीम कि शुरुआत की थी. मंसूर ने 2006 में आई मॉनेटरी अडवाइजरी (IMA) के नाम से एक कंपनी बनाई।

जिसमें उसने इनवेस्टर्स को बताया कि यह संस्था बुलियन में निवेश करेगी और निवेशकों को 7-8 प्रतिशत रिटर्न देगी. चूंकि इस्लाम में ब्याज से मिली रकम को इस्लाम विरोधी माना जाता है इसलिए उसने धर्म का कार्ड खेलते हुए निवेशकों को ‘बिजनेस पार्टरनर’ का दर्ज दिया।

आईएमए में पांच लाख रुपये लगा चुके नाविद ने बताया कि उसने मुसलमानों को धार्मिक भावनाओं के जरिए फंसाने का हथकंडा अपनाया. हालांकि उसके इस फ्रॉड का अंदाजा साल 2017 से ही निवेशकों को होने लगा था, जब लोगों का रिटर्न गिरकर पहले 9 से 5 फीसदी तक आया और फिर 2018 आते-आते सिर्फ 3 फीसदी रह गया. इस साल फरवरी में रिटर्न घटकर मात्र 1 फीसदी रह गया. लेकिन तगड़ा झटका तो निवेशकों को मई में लगा जब एक फीसदी रिटर्न भी खत्म हो गया. इसके बाद लोगों का सब्र का बांध टूट गया और अपनी पूंजी वापस लेने की मांग की है।

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