इम्तियाज जलील ने शिवसेना का 40 साल पुराना किला ढ़हाकर बनाया नया रिकॉर्ड- देखिए

नई दिल्ली: ऑल इंडिया मजलिस ऐ इत्तेहादुल मुस्लिमीन के इतिहास में 2019 का चुनाव सबसे महत्वपूर्ण चुनाव होगया है क्योंकि पहली बार पार्टी के साँसद की संख्या एक से बढ़कर दो हुई है,असदउद्दीन ओवैसी के नेतृत्व में मजलिस देशभर में मक़बूल हो रही है।

इम्तियाज जलील महाराष्ट्र से लोकसभा पहुंचने वाले पहले गैर-कांग्रेसी मुसलमान सदस्य हैं। औरंगाबाद लोकसभा सीट पर उन्होंने शिवसेना के चंद्रकांत खैरे को 4492 मतों से मात दी है। महाराष्ट्र से इस चुनाव से पहले 11 मुस्लिम लोकसभा पहुंचे, लेकिन वे सब कांग्रेस के थे।

पत्रकारिता से राजनीति में आए जलील ने कहा, ‘मैंने अपना प्रचार अभियान विकास पर केन्द्रित रखा लेकिन शिवसेना ने अपना चुनाव प्रचार धार्मिक भावनाओं के इर्द-गिर्द केंद्रित रखा।’ एक राष्ट्रीय समाचार चैनल में संवाददाता के तौर पर काम कर रहे जलील ने 2014 में नौकरी छोड़ी और औरंगाबाद मध्य सीट से विधानसभा चुनाव लड़कर उसमें जीत हासिल की।

इस बार, एनसीपी ने अकोला सीट से बीजेपी सांसद संजय धोत्रे के खिलाफ हिदायत पटेल को मैदान में उतारा लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। अन्य किसी भी बड़ी पार्टी ने इस बार किसी मुस्लिम उम्मीदवार को नहीं उतारा।

कांग्रेस के टिकट पर 1962 में अकोला लोकसभा सीट से मोहम्मद मोहिबुल हक चुनाव जीते थे। 1967 और 1971 में भी अकोला सीट से दो मुसलमान निचले सदन में पहुंचे। पूर्व केंद्रीय मंत्री गुलाम नबी आज़ाद ने 1984 में कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में वाशिम लोकसभा क्षेत्र से जीत हासिल की थी।

कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में एआर अंतुले महाराष्ट्र से लोकसभा के लिए चुने गए अंतिम मुस्लिम प्रत्याशी थे। उन्होंने 1999 का चुनाव जीता लेकिन 2004 में शिवसेना के उम्मीदवार अनंत गीते से हार गए। अधिकारी ने बताया कि महाराष्ट्र में तकरीबन 1.30 करोड़ मुसलमान हैं। राज्य की जनसंख्या में 11 फीसदी से अधिक उनकी आबादी है।

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