अखिलेश-मायावती के मंच पर नजर आये रवीश कुमार,ट्रोल करने वालो को दिया जवाब,देखिए क्या कहा ?

नई दिल्ली: देश में चल रहे सबसे बड़े सियासी संग्राम लोकसभा चुनाव में तमाम राजनीतिक पार्टियों ने दम खम दिखाकर अपना लोहा मनवाने में दम लगा रखा है,जनता से नये नये वादे और लुभाने वाली स्कीम का लंबा ब्योरा चुनावी वादों की शक्ल में पार्टियों की तरफ से किया जारहा है।

पाँच चरणों के मतदान के बाद अब उत्तर प्रदेश की कई सीटों पर मतदान होना बाकी है मंगलवार को महागठबंधन ने जौनपुर में सँयुक्त रैली करी जिसमें सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती भी मौजूद थीं। इस रैली में पत्रकार रवीश कुमार भी दिखाई दिए। इस रैली की एक तस्वीर सोशल मीडिया पर काफी दिखाई दे रही है। दरअसल इस तस्वीर में मायावती मंच पर बैठी हुई हैं, वहीं सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव भाषण दे रहे हैं। इस दौरान रवीश कुमार मंच पर मायावती के पीछे खड़े दिखाई दे रहे हैं। इस तस्वीर पर सोशल मीडिया यूजर्स खूब ट्रोल कर रहे हैं।

दरअसल रवीश कुमार अपने प्राइम टाइम शो में सत्ताधारी पार्टी के खिलाफ मुखर रहे हैं। यही वजह है कि गठबंधन की रैली में रवीश कुमार के मंच पर दिखने को लेकर कई यूजर्स कमेंट कर रहे हैं। हालांकि सोशल मीडिया पर ट्रोल होने के बाद रवीश कुमार ने भी इस पर अपनी सफाई देते हुए पलटवार किया है। फेसबुक पर लिखी एक पोस्ट में रवीश कुमार ने लिखा है कि “कुछ लोगों को काम नहीं है।

आज यूपी में अखिलेश यादव के साथ कैंपेन ट्रेल कवर कर रहा था। उनके हेलीकॉप्टर में और रैलियों में। मंच पर भी गया। देखने की कि नेता के भाषण का रेस्पांस है। अब उसे ऐसे घेर कर बता रहे हैं कि मुझे बैठने की कुर्सी नहीं दी गई। थोड़ा लेवल बढ़ाओ भाई। वैसे कुर्सी दे गई थी, लेकिन मैं बैठने नहीं फोटो खींचने गया था।” इस पोस्ट के साथ रवीश कुमार ने एक तस्वीर भी पोस्ट की है, जिसमें गठबंधन की रैली के मंच पर दिखने को लेकर उन पर तंज कसा गया है। रवीश कुमार अखिलेश यादव के साथ भी दिखाई दिए।

बता दें कि उत्तर प्रदेश में सपा-बसपा-रालोद गठबंधन करके चुनाव लड़ रही हैं। यही वजह है कि बीते लोकसभा चुनावों में उत्तर प्रदेश में शानदार सफलता हासिल करने वाली भाजपा को इस बार कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मायावती और अखिलेश यादव घूम-घूमकर राज्यभर में चुनावी रैलियां कर रहे हैं और भाजपा सरकार, पीएम मोदी को घेरने की कोशिशें कर रहे हैं। वहीं दोनों नेता कई संयुक्त रैलियों को भी संबोधित करेंगे, ताकि सपा और बसपा के वोटबैंक को एकजुट रखा जा सके।

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